चार साल में पहली बार सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव मंज़ूर, फिर भी सरकार को कोई टेंशन नहीं। जानिए क्यों ?

संसद में मॉनसून सत्र के पहले दिन मोदी सरकार के खिलाफ टीडीपी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा एवं वोटिंग के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है. टीडीपी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है. हालांकि इसके बावजूद सरकार इसे लेकर ज्यादा आशंकित नहीं है. उसके बेपरवाह होने के पीछे लोकसभा में सीटों का वो गणित है जिसमें उसे विपक्ष की तुलना में बहुमत हासिल है।

यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है। हालांकि नंबर गेम के मामले में बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को इससे कोई खतरा नहीं है। नरेंद्र मोदी सरकार के पास एनडीए के सभी सहयोगी दलों को मिलाकर लोकसभा में 310 सांसद हैं। ऐसे में यह अविश्वास प्रस्ताव महज सरकार के खिलाफ सांकेतिक विरोध के तौर पर ही माना जाएगा। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि मॉनसून सत्र में लोकसभा में आठ पेंडिंग बिल और छह अध्यादेश पर चर्चा होगी. इसके अलावा राज्यसभा में भी 40 बिल पर चर्चा का इंतज़ार है. बता दें कि आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग सहित कई अन्य मुद्दों पर अवरोधों और स्थगनों के कारण संसद के बजट सत्र में कोई काम नहीं हो सका था. मंगलवार को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील की थी कि वे सरकार को प्रभावी तरीके से संसद की कार्यवाही चलाने में मदद करें।

मोदी सरकार के चार साल से ज्यादा के कार्यकाल में पहली बार आए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विपक्ष के तेवर सख्त हैं. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से जब पूछा गया कि क्या आपके पास पर्याप्त नंबर हैं तो उनका जवाब था कि कौन कहता है कि हमारे पास नंबर नहीं हैं? अविश्वास प्रस्ताव मोदी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा की तरह हैं. लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के पास अकेले 273 सांसद हैं. जबकि बहुमत के लिए उसे 272 सांसदों का आंकड़ा चाहिए. ऐसे में बीजेपी के पास बहुमत से एक सदस्य ज्यादा है. लेकिन मौजूदा समय में बीजेपी के कई सांसद बागी रुख अख्तियार किए हुए हैं. इनमें शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और सावित्री बाई फूले शामिल हैं।

हालांकि मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब बीजेपी बड़ी तादाद में अपने मौजूदा सांसदों के टिकट काटने की तैयारी कर रही है. ऐसे सांसद जिन्हें अपना टिकट कटने की पूरा भरोसा है. उनके रुख को लेकर सत्ता पक्ष में शंका हो सकती है. हालांकि पार्टी की ओर से इस बारे में व्हिप जारी कर दिया गया है।

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