सुप्रीम कोर्ट ने आडवाणी, उमा भारती और मुरली मनोहर को दी बड़ी राहत, आज सुनाया फैसला

देश की सियासत को साफ़ सुथरी बनाने की बाद अक्सर चर्चा में आ ही जाती है लेकिन भारतीय समाज का स्वारूप ही कुछ ऐसा है कि यहाँ पर बाहुबली की चलती है और जनता को पसंद भी बाहुबली ही आते हैं. आजाद भारत के इतिहास में ऐसा उदाहरण बहुत ही कम होगा, कि चुनाव में अगर कोई बाहुबली खड़ा हो तो सामने वाला शायद ही जीत पाए.

आम तौर पर देखा जाता है कि जीत बाहुबली की ही होती है. अब यह अलग बात है कि चुनावी प्रचार किस तरह किया गया है और जनता ने किस आधार पर उस बाहुबली को अपना नेता चुना है. आये दिन एडीआर की तरफ से ऐसी तमाम रिपोर्ट सामने आती रहती हैं, जिसमे भारतीय सियासत में छुपे अपराधीकरण को आसानी से पहचाना जा सकता है.

बहरहाल, अब ऐसे ही आरोपों से घिरे नेताओ के चुनाव लड़ने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. दरअसल कोर्ट ने अपने इस फैलसे में कहा है कि महज़ चार्जशीट के आधार पर नेताओं को चुनाव लड़ने स नहीं रोका जा सकता है.

कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ़ इंकार करते हुए गेंद संसद के पाले में डाल दिया है. कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में संसद को ही कानून बनाना चाहिए. कोर्ट के इस फैसले के बाद आडवाणी  से लेकर मृरली मनोहर जोशी और उमा भारती के साथ साथ कई दिग्गज नेताओं को राहत मिली है.

बता दें कि बाबरी मस्जिद विवाद में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी  और उमा भारती पर आपराधिक मुकदमा चला था. लेकिन अब कोर्ट ने कहा है कि महज़ चार्जशीट के आधार पर इन नेताओं को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है. कोर्ट के इस फैसले से उन सभी नेताओं को रहत मिली है, जिनका नाम तमाम बड़े अपराधों में आया है लेकिन फैसला अभी लंबित है.

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