असदुद्दीन ओवैसी ‘सांप्रदायिक’ छवि के मालिक हैं- जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द

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नई दिल्ली: जमाअत इस्लामी हिन्द ने कहा कि मजलिस इत्तिहादुलमुस्लीमीन (MIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी “सांप्रदायिक” छवि रखते हैं. शनिवार को अपने सदर दफ्तर पर आयोजित माहाना प्रेस कांफ्रेंस में जमाअत के अमीर (अध्यक्ष ) मौलाना जलालुद्दीन उमरी ने पत्रकारों से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि MIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी कुछ कारणों से एक “सांप्रदायिक छवि” रखते हैं. बता दें कि जमाअत इस्लामी हिंद भारतीय मुसलमानों की एक प्रभावशाली संस्था है.

देश में बढ़ते हुए सांप्रदायिक रुझानात पर जमाअत ने कहा कि ऐसा महसूस होता है जैसे विविध संस्कृति वाले इस देश को नफरत और पक्षपात के रास्ते पर ले जाने की कोशिश की जा रही है. जमाअत के अनुसार देश में मानवता और सौहार्द्र जैसी सामाजिक मूल्यें तेजी से गिरती जा रही हैं. ये सूरतहाल सबके लिए समान रूप से अत्यंत हानिकारक है. और देष के गंभीर नागरिकों के लिए चिंता का विषय है.

इसी सन्दर्भ में बात करते हुए मौलाना उमरी ने कहा कि कुछ कारणवश एमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी की इमेज भी एक “सांप्रदायिक नेता” की बन गई है. दरअसल उनसे पूछा गया था कि किया वह ओवैसी को एक सेक्युलर मुस्लिम नेता के रूप में देखते हैं?
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देश में नफरत के बढ़ते हुए माहौल पर बात करते हुए उन्हों ने ये भी कहा कि देश की बहुसंख्यक अवाम अमनपसंद है और वे धर्म और जाति के आधार पर किसी भी पक्षपात के खिलाफ हैं. मौलाना उमरी ने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि देश के पांच राज्यों के चुनावों के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं और स्वंय प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों ने जिस तरह नफरत और भेदभावपूर्ण बयान दिये हैं उनसे न ये कि केवल लोकतंत्र का दमन हुआ है, बल्कि शासनिक पद और उसकी गरिमा भी धूमिल हुई है और पूरी दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है.

मौलाना उमरी ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि चुनाव से पहले सर्वोच्च न्यायालय ने धर्म और जात-पात के इस्तेमाल को दंडनीय करार दिया था, लेकिन कुछ राजनेता अपने भड़काऊ भाषणों से न केवल देश की सामाजिक संरचना को बिखेरने में लगे रहे, बल्कि कब्रिस्तान- श्मशान और रमज़ान-दिवाली के नाम पर उन्होंने चुनावों को साम्प्रदायिकता के आधार पर प्रेरित करने का प्रयास किया जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए हानिकारक है.

मौलाना उमरी ने कहा कि जमाअत इस्लामी हिन्द चुनाव आयोग से मांग करती है कि वह देश के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे ताकि लोकतंत्र की सुरक्षा कर उसके अस्तित्व को बचाया जा सके. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह चुनावी भाषणों में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने और एकदूसरे के विरुद्ध उपशब्द निकालने की नकारात्मक राजनीति पर भी लगाम कसे.

मौलाना उमरी ने प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान अग्रणी नेता, पूर्व सांसद और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत के पूर्व अध्यक्ष सैयद शहाबुद्दीन के मृत्यु पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि हम ने क़ौम और देश के एक दीर्घानुभवी और बेबाक सेवक को खो दिया है.

प्रेस वार्ता में जमाअत अध्यक्ष ने शिक्षण संस्थानों (कॉलेजों और विष्वविद्यालय कैंपसों) में फॉसिवादी ताकतों के बढ़ते प्रभावों पर अपनी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कालेज में बीजेपी छात्र संगठन एबीवीपी के सदस्यों ने जिस तरह छात्रों, अध्यापकों और पत्रकारों के खिलाफ हिंसात्मक व्यवहार किया और उनका अपमान किया वह निन्दनीय और चिंताजनक है.

एबीवीपी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये वही तत्व हैं जिन्होंने जेएनयू के होनहार छात्र नजीब को गायब किया और शोधार्थी छात्र रोहित वेमूला को आत्महत्या पर मजबूर किया. इसके अलावा भी कई शिक्षण संस्थानों में उत्पीड़न और हिंसा का रास्ता अपनाकर अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मौलिक अधिकारों पर रोक लगाने के प्रयास किये गये हैं.

admin

One Comment;

  1. Kohinoor Alam Ansari said:

    Humaare mulk mein Loktantra ki dhajjiyaan kuch sampridayik taqten bigaad rahi hain aur yeh humaare desh ke liye chinta ki baat hai.. Humaare desh ke yeh gumraah leader hain Jo zaat-paat ke naam per desh ki kursi hathiyana chahte hain….

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