अयोध्या मामला: बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने कहा, कोर्ट खुद फैसला करे

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नई दिल्ली। पिछले 50 वर्षों से जारी बाबरी मस्जिद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी का बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने स्वागत किया है। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कन्वेनर ज़फरयाब जीलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए सुझाव के खिलाफ नहीं हैं। मगर हमारा मानना है कि ऐसा तभी संभव हो सकता है जब कोर्ट खुद इस झगड़े का फैसला करे I

गौरतलब है कि अयोध्या के रामजन्मभूमि मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा कि ये मुद्दा बेहद संवेदनशील है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे का हल आपसी सहमति से हो। अगर जरुरत पड़ी तो कोर्ट मध्यस्थता के लिए तैयार है।

प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसे धार्मिक मुद्दों को बातचीत से सुलझाया जा सकता है और उन्होंने सर्वसम्मति पर पहुंचने के लिए मध्यस्थता करने की पेशकश भी की. पीठ में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस के कौल भी शामिल हैं I पीठ ने कहा, ‘ये धर्म और भावनाओं से जुड़े मुद्दे हैं I ये ऐसे मुद्दे है जहां विवाद को खत्म करने के लिए सभी पक्षों को एक साथ बैठना चाहिये और सर्वसम्मति से कोई निर्णय लेना चाहिये I आप सभी साथ बैठ सकते हैं और सौहार्दपूर्ण बैठक कर सकते हैंI’’ उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी ने इस मामले पर तत्काल सुनवायी की मांग के बाद की है ई

इधर बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों को एक साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए। योगी ने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हैं। दोनों पक्षों को एक साथ बैठकर इस मसले का समाधान निकालना चाहिए।’

योगी को इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी समर्थन दिया है। राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हुए आडवाणी ने कहा कि इसे पर आम सहमति बननी चाहिए। आडवाणी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है। मामले में शामिल सभी पक्षों को सहमति से इसका समाधान निकालना चाहिए।’

दूसरी तरफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य डॉ. एसक्यूआर इलयास ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हैं कि कोर्ट इस मामले में मध्यस्थता के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने ये भी जरुर कहा कि अगर वार्ता होती है तो इसमें ये शर्त होगी कि कोई पूर्व कल्पित धारणा इस बैठक में नहीं रखी जानी चाहिए।

उनका कहना था कि दोनों ही पक्ष खुले दिमाग से बैठक में शामिल हों। हमसे ये कहना कि उस जगह को छोड़ दें और सरेंडर कर दें ये कोई विकल्प नहीं है। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य डॉ. एसक्यूआर इलयास ने कहा कि पहले भी इस मुद्दे पर कई बार मध्यस्थता की कोशिश की गई, हालांकि इसमें कोई भी हल नहीं निकल सका।

क़ासिम रसूल इल्यास का कहना था मध्यस्थता की कोशिशें पहले भी पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच हो चुकी हैं I उस दौरान हुई मध्यस्थता में कोई तय फैसला नहीं निकल सका। उन्होंने कहा कि अगर दूसरा पक्ष उस जगह पर राम जन्मभूमि होने की बात रखता है तो उसे इस संदर्भ में सबूत देना होगा। सभी दावे सबूतों के आधार पर किए जाने चाहिए।

कमिटी के सदस्य क़ासिम रसूल इल्यास का साफ कहना था कि इससे आपसी सहमति से मामला सुलझाने में मदद मिलेगी। उन्हों ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मध्यस्थता के लिए तैयार हों तो हम बातचीत के लिये तैयार हैं। उनकी मध्यस्थता से मामले का हल निकल सकता है।

फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

admin

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